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कभी-कभी,
खुद से मुलाक़ात भी
बारिश की पहली बूंद जैसी होती है
हल्की, नर्म, मगर दिल तक उतर जाने वाली।
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आईने को आज
आराम दे दो…
तुम्हारी असल चमक
उस पर नहीं,
तुम्हारे मुस्कुराने में रहती है।
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तुम्हारे भीतर
एक महक है
जैसे किसी शाम
बिना वजह खिल जाए कोई फूल।
ये महक,
किसी की तारीफ़ से नहीं,
तुम्हारे होने से महक लेती है।
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डर ने भले तुम्हारे दरवाज़े पर
धीमे से दस्तक दी हो,
पर तुम्हारी हिम्मत
हमेशा उस खिड़की से आती है
जहाँ सूरज शांति से बैठा रहता है।
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और सच कहूँ
तुम में जो ख़ामोशी है,
वो भी एक मिठास लिए हुए है,
जैसे कोई बात प्यार बनकर
होठों तक आए और
कहने से पहले ही मुस्कुरा दे।
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तुम वो रोशनी हो
जो किसी रोशनी की मोहताज़ नहीं
आँखें बंद हों तब भी
अपना रास्ता खुद पहचान ही लेती हो।
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आज बस इतना करना है
खुद को टटोलना नहीं,
खुद को महसूस करना…
जैसे कोई अपने ही हाथों को
पहली बार प्यार से छू ले।
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क्योंकि तुम,
अपने हर रंग में,
अपने हर मौसम में
काफ़ी हो, ख़ूबसूरत हो,
और अपने होने मात्र से
इस दुनिया को ये अहसास
दिला देती हो।
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चमको…
प्यार बनकर,
खुशी बनकर,
खुद के लिए। ✨🤍
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—Rajeshwari 🧿💕
राजेश्वरी जी 🙏🌹
बहुत ही कोमल और आत्मस्पर्शी रचना।
“आईने को आज आराम दे दो…” यह पंक्ति मन में ठहर गई।
आपने बड़े सहज भाव से याद दिलाया कि असली चमक भीतर की मुस्कान में बसती है।
हर अनुच्छेद में आत्मस्वीकृति, साहस और मौन की मधुरता का जो चित्र आपने उकेरा है, वह अत्यंत सुंदर और सुकून देने वाला है।
आपकी इतनी कोमल और सुंदर प्रतिक्रिया के लिए दिल से धन्यवाद विजय जी 🙏🌹। यह जानकर बहुत खुशी हुई कि मेरी रचनाएँ आपके दिल को छू पाईं। आपकी सराहना मेरे लिए बहुत मायने रखती है और ऐसे शब्द मेरे लेखन की यात्रा को और भी खास बना देते हैं।🤍✨
Woww superb poem ❤️
Thank you! 🤍✨Your words mean a lot, it’s wonderful to know it touched you.🤍✨
आपकी कविता तो सरकोपर ❤️😊बहुत अच्छा आपके दिमाग से निकला हर शब्द हमेरे लिये बहुत कुछ सिकता है | आपका दिमाग कि लहर हर किसीके मनं को शुती है!
आपकी इतनी प्यारी और उत्साह भरी प्रतिक्रिया के लिए दिल से धन्यवाद ❤️😊। यह जानकर बहुत खुशी हुई कि मेरी शब्दों की लहरें आपके दिल तक पहुँच रही हैं।
बहुत सुंदर! 👌
बहुत-बहुत धन्यवाद! 🤍 ✨आपकी सराहना मेरे लिए बहुत खास है।🤍✨
आपकी रचना सचमुच बेहद कोमल, आत्मीय और भीतर तक उतर जाने वाली है। हर पंक्ति जैसे किसी शांत बारिश की बूंद बनकर मन को छूती है। आपने जिस तरह आत्म-स्वीकृति, सुकून और भीतर की रोशनी को शब्द दिए हैं, वह बहुत सुंदर और सुकून देने वाला अनुभव है।
“आईने को आज आराम दे दो…” और “तुम वो रोशनी हो जो किसी रोशनी की मोहताज़ नहीं” जैसी पंक्तियाँ विशेष रूप से मन में ठहर जाती हैं। इनमें एक गहरी सच्चाई और अपनापन है, जो पाठक को खुद से जुड़ने का एहसास कराता है। आपकी भाषा सरल होते हुए भी बेहद प्रभावशाली है, और भाव इतने सजीव हैं कि हर चित्र आँखों के सामने उभर आता है।
आपकी इतनी कोमल और आत्मीय प्रतिक्रिया पढ़कर मन को गहरा सुकून मिला 🤍✨। आपकी शब्दों ने मेरी रचनाओं को और भी खास बना दिया। सच में, यही जुड़ाव और समझ मेरी लेखनी के सफर को अर्थ देती है। धन्यवाद, इस अपनापन और संवेदनशीलता के लिए।🤍✨
आपके इतने स्नेहभरे और हृदयस्पर्शी शब्दों के लिए दिल से आभार 🤍। यह जानकर सचमुच बहुत खुशी हुई कि मेरी प्रतिक्रिया ने आपके मन को सुकून दिया और आपकी रचनात्मक यात्रा में कुछ अर्थ जोड़ सकी। आपकी संवेदनशीलता, गहराई और आत्मीय अभिव्यक्ति ही आपकी लेखनी को इतना विशिष्ट बनाती है।
ऐसा जुड़ाव और परस्पर समझ ही तो शब्दों को आत्मा देती है। आपकी लेखनी यूँ ही भावनाओं की रोशनी फैलाती रहे—इसी शुभकामना के साथ, धन्यवाद इस सुंदर संवाद और अपनत्व के लिए। ✨
Bahut hi sundar tareeke se likha hai apne ye kavita. Pyari prastuti… 👍💯
Bahut-bahut shukriya Ashish 😊
Aapko meri rachna pasand aayi, mere liye bahut khushi ki baat hai 🤍✨
वाह वाह बहुत सुंदर भाव और उत्तम प्रस्तुति। 👌👌👌
आपकी इतनी खूबसूरत प्रशंसा के लिए दिल से धन्यवाद 🤍 ✨
आपकी इतनी कोमल और आत्मीय प्रतिक्रिया पढ़कर मन को गहरा सुकून मिला 🤍✨। आपकी शब्दों ने मेरी रचनाओं को और भी खास बना दिया। सच में, यही जुड़ाव और समझ मेरी लेखनी के सफर को अर्थ देती है। धन्यवाद, इस अपनापन और संवेदनशीलता के लिए।🤍✨
बहुत-बहुत धन्यवाद! 🤍✨आपकी सराहना मेरे लिए बहुत खास है।🤍✨
यह रचना दिल को छू लेने वाली है। 🤍✨ शब्द जैसे बारिश की कोमल बूंद बनकर आत्मा तक उतरते हैं। आत्मस्वीकार, मौन की मिठास और भीतर की रोशनी को जिस सुंदरता से पिरोया है, वह अद्भुत है। आपकी संवेदनशीलता और दार्शनिक गहराई प्रेरणादायक है। यूँ ही प्रेम और प्रकाश बाँटते रहें। 🌸💫
इतने सुंदर और दिल से निकले हुए शब्दों के लिए बहुत धन्यवाद…🤍✨
बहुत सुन्दर 👌👌
बहुत-बहुत धन्यवाद आपका 🤍🙏🏻✨